जहानाबाद

नदी में पुल निर्माण की सरकार ने दी स्वीकृति

मोगल बिगहा व लांजो-लोदीपुर गांव के बीच दरधा नदी में बनेंगे पुल दो भागों में विभाजित पंचायत के ग्रामीणों की राह हो जाएगी आसान कम हो जाएगी राजधानी की दूरी, किसानों का बाजार में पहुंचेगी उपज 03 करोड़ 52 लाख 92 हजार में मोगल बिगहा में बनेगा पुल 03 करोड़ 71 लाख 44 हजार में लांजो-लोदीपुर में बनेगा पुल जहानाबाद। कार्यालय संवाददाता जहानाबाद जिले की दरधा नदी में दो पुलों के निर्माण की स्वीकृति सरकार ने दी है। पहला पुल मोगल बिगहा के पास और दूसरा लांजो व लोदीपुर गांव के बीच बनेगा। इन पुलों का निर्माण ग्रामीण कार्य विभाग द्वारा कराया जाएगा। अगर सबकुछ ठीक रहा तो पुल का निर्माण कार्य डेढ़ साल में पूरा हो जाएगा। इन पुलों के निर्माण हो जाने से न सिर्फ दो भागों में विभाजीत सैदाबाद पंचायत के गांवों के ग्रामीणों की राह आसान हो जाएगी, बल्कि मोगल बिगहा के आसपास के ग्रामीणों की राजधानी पटना की राह भी आसान हो जाएगी। किसानों और व्यापारियों के लिए फायदेमंद साबित होगा। किसानों की उपज आसानी से बाजार में पहुंच जाएगा और कारोबारी भी अपना माल ला व ले जा सकेंगे। काको प्रखंड की दरधा नदी में मोगल बिगहा के पास 352.92 लाख एवं लांजो-लोदीपुर गांव के बीच 371.44 लाख रुपए में पुल बनाने की सरकार से स्वीकृति मिली है। मोगल बिगहा के पास दरधा नदी में पुल बन जाने से उसरी, बरांवा, बीबीपुर, नरावां, मिल्की, कोशियावां, भदसारा आदि गांवों के ग्रामीणों की राह आसान हो जाएगी। इन गांवों के ग्रामीणों को पटना जाने के लिए जिला मुख्यालय जहानाबाद की सैर नहीं करनी पड़ेगी। वे सीधे नदौल पहुंच जाएंगे और ट्रेन से पटना चले जाएंगे। फिलवक्त उन्हें अपने गांव से काको और काको से जहानाबाद जाना पड़ता है। इसी तरह लंजो व लोदीपुर के बीच पुल बनने के बाद दो भागों में विभाजित सैदाबाद पंचायत एक हो जाएगा। वर्तमान में इस पंचायत को दरधा नदी दो भागों में विभाजित करती है। नदी के एक ओर फिरोजी, पीर अली चक, नरावां, टिमलपुर है, तो दूसरे छोर पर सैदाबाद, गोलकपुर और लंजो गांव हैं। एक ही पंचायत के दो भागों में विभक्त होने से प्रशासनिक और विकास के कार्य बाधित होते हैं। पंचायत मुख्यालय आने-जाने में भी ग्रामीणों की होनेवाली परेशानी दूर हो जाएगी। ग्रामीणों राजनंदन शर्मा, उमाशंकर सिंह बताते हैं कि दोनों पुलों के निर्माण हो जाने से किसानों की उपज बाजार में आसानी से पहुंच जाएगी। उन्हें बिचौलिए के हाथों अनाज नहीं बेचना पड़ेगा। बाजार में ले जाने पर अच्छी कीमत भी मिल जाएगी। लंबी दूरी तय कर उपज ले जाने की चिंता दूर हो जाएगी। रामाधार मांझी बताते हैं कि गांव में छोटे-मोटे कारोबार होते हैं। किराना, पारचून व अन्य चीजों की दुकानें हैं। इन कारोबार से जुड़े लोग बाजार से कम समय में खरीद-बिक्री कर लौट सकेंगे।

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